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East Champaran News: पूर्वी चंपारण में लोन के नाम पर ठगी का खुलासा, 10 हजार लेकर थमा देते थे कागज वाला लिफाफा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार।

मोतिहारी, 6 अक्टूबर, आलम की खबर: पूर्वी चंपारण में लोन दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह का तरीका ऐसा था कि पीड़ितों को शुरुआत में सब कुछ लोन की प्रक्रिया का हिस्सा लगता था, लेकिन बाद में उन्हें ठगी का पता चलता था। आरोपी लोगों को एक लाख रुपये तक का लोन दिलाने का भरोसा देता था और इसके बदले हजारों रुपये वसूल करता था। पैसे लेने के बाद पीड़ितों को एक लिफाफा दिया जाता था, लेकिन उसे खोलने पर अंदर रुपये या लोन से जुड़े दस्तावेज की जगह कागज के टुकड़े मिलते थे।

मामला कल्याणपुर थाना क्षेत्र के वृंदावन पंचायत से सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए सीतामढ़ी जिले के बेलसंड थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव निवासी चंदन कुमार को मधुबन से गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में लोन के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

फाइनेंस कंपनी से जुड़ा होने का करता था दावा

पुलिस जांच के अनुसार आरोपी खुद को फाइनेंस कंपनी से जुड़ा बताकर लोगों को भरोसे में लेता था। इसके बाद एक लाख रुपये तक का लोन दिलाने की बात कही जाती थी। लोन की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर लोगों से रकम ली जाती थी।

कई मामलों में यह राशि करीब 10 हजार रुपये बताई गई है, जबकि कुछ पीड़ितों से 17,500 रुपये तक वसूले जाने की जानकारी जांच में सामने आई है। आरोपी कथित तौर पर लोगों से कागजात पर हस्ताक्षर भी करवाता था, जिससे पूरे मामले में दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका भी पैदा हुई है।

लिफाफा खोलते ही सामने आया ठगी का खेल

वृंदावन पंचायत के लोगों को लोन मिलने की उम्मीद में पैसे देने के बाद कल्याणपुर बुलाया गया था। पीड़ितों को लिफाफा दिया गया और उन्हें बताया गया कि इसमें लोन से संबंधित सामग्री है।

जब लोगों ने लिफाफा खोला तो उनके होश उड़ गए। अंदर रुपये या लोन के कागजात के बजाय केवल कागज के टुकड़े मिले। जिन मोबाइल नंबरों के माध्यम से आरोपी से संपर्क किया जा रहा था, उन पर फोन करने की कोशिश की गई तो नंबर बंद मिला।

इसके बाद पीड़ितों को समझ में आया कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। मामले की शिकायत पुलिस से की गई, जिसके बाद जांच का सिलसिला शुरू हुआ।

शिकायत के बाद पुलिस ने दबोचा आरोपी

पुलिस को शिकायत मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई गई। इसी दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने मधुबन इलाके में कार्रवाई की और चंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में गिरोह की कार्यप्रणाली और उसके नेटवर्क से जुड़ी जानकारी मिली है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल एक इलाके तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर लोगों को लोन का लालच देकर अपने जाल में फंसाने की कोशिश करता था।

कई इलाकों तक फैले नेटवर्क की जांच

पुलिस के मुताबिक यह गिरोह वर्ष 2024 से सक्रिय था। मोतिहारी, चकिया, पिपरा, कल्याणपुर और आसपास के दूसरे इलाकों में लोन दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क किए जाने की बात सामने आई है।

जांच के दौरान मधुबन में गिरोह से जुड़े कार्यालय के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वहां से कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितने लोगों से लोन के नाम पर रकम वसूली गई।

बड़ी संख्या में कागजात और एटीएम कार्ड बरामद

गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। इनमें कागजात, लिफाफे, सदस्यता आवेदन, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अलग-अलग बैंकों के चेक शामिल बताए गए हैं।

पुलिस की ओर से बरामदगी में 68 कागज, 58 लिफाफे और एटीएम कार्ड समेत कई मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज शामिल होने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग बैंकों से संबंधित चेक भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

बरामद एटीएम कार्ड और दस्तावेजों को लेकर पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था और क्या इनके जरिए पीड़ितों के बैंक खातों से संबंधित कोई अन्य गतिविधि की गई।

दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में जुटी पुलिस

एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश में जुट गई है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

जांच का अहम बिंदु यह भी है कि वर्ष 2024 से अब तक इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य किन माध्यमों से लोगों तक पहुंचते थे और लोन दिलाने के नाम पर तैयार किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।

फिलहाल एक गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है। यदि जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों और पीड़ितों से जुड़ी नई जानकारी सामने आती है तो मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

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लोन और वित्तीय सहायता के नाम पर होने वाली ठगी से बचने के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को पैसे देने से पहले उसकी पहचान और संबंधित वित्तीय प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

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